Petrol Diesel price : क्यों होती है सरकार के नियंत्रण से बाहर

Petrol Diesel price : क्यों होती है सरकार के नियंत्रण से बाहर

Petrol Diesel price : मैं झारखंड में रहता हूं और यहां पर अभी Petrol का प्राइस ₹90 लीटर है जबकि मुंबई में अभी पेट्रोल का प्राइस ₹112 लीटर है। अब आप सोच रहे होंगे कि झारखंड में पेट्रोल ₹90 जबकि मुंबई में ₹112 लीटर क्यों है? पेट्रोल के प्राइस में आखिर  इतना अंतर किस कारण से आता है? इसके अलावा आप यह भी सोच रहे होंगे की एक ही देश में अलग अलग पेट्रोल के लिए पैसे क्यों देने पड़ते हैं? अब जब तेल इतना महंगा हो गया है तो सरकार तेल के दाम घटाती क्यों नहीं? दोस्तों मैं आपके इन्हीं सवालों का जवाब आज आपको इस Article में बताने जा रहा हूं।

Petrol and diesel हमारे लिए बहुत ही उपयोगी है। इसके बिना हमारे देश के अर्थव्यवस्था की कल्पना भी नहीं कर सकते।
आइए सबसे पहले जानते हैं कि पेट्रोल और डीजल तैयार कैसे किए जाते हैं, तथा उसे तैयार करने में तेल कंपनियों को कितने रुपए भुगतान करना पड़ता है?

क्यों बढ़ते हैं पेट्रोल डीजल के दाम

दोस्तों हमारे देश में लगभग 80% तेल विदेशों से आयात किया जाता है। यानी कि हम 80% तेल विदेशों से खरीदते हैं।जबकि 20% ही खुद अपने देश में तैयार करते हैं। विदेशों से हम कच्चा तेल प्रति बैरल के हिसाब से खरीदते हैं, जहां एक बैरल में लगभग 162 लीटर कच्चा तेल होता है। जिसके लिए तेल कंपनियों को $70 से $80 देने पड़ते हैं।

उसके बाद उसे बड़े-बड़े रिफाइनरियों में रिफाइंड किया जाता है। रिफाइन करने के बाद उसमें से बहुत सारे पदार्थ निकलते हैं। जिसमें से पेट्रोल डीजल और LPG सबसे महत्वपूर्ण है।तेल कंपनियों को विदेशों से तेल खरीदने और उसको रिफाइन करने में लगभग ₹33 प्रति लीटर का कीमत आता है।

जिस कीमत पर हम 1 लीटर पेट्रोल खरीदते हैं उसका 48% हिस्सा ही वास्तविक कीमत होता है। उदाहरण के लिए अगर हम 1 लीटर Petrol ₹70 में खरीदते हैं, तो तेल कंपनियों को उसे विदेशों से खरीदने में सिर्फ ₹33 ही लगता है। इसके अलावा केंद्र सरकार 35% एक्सरसाइज ड्यूटी तथा राज्य सरकार 15% वैट और 2% कस्टम ड्यूटी भी लगाई जाती है। और इस तरह से ₹33 का तेल ₹70 का हो जाता है।

हाल ही में तेल कंपनियों ने तेल के दाम लगातार बढ़ाए हैं। लेकिन सरकार इस पर कुछ नहीं कर पा रही है, क्योंकि अगर सरकार तेल का दाम ₹1 भी कम करती है तो सरकार को प्रतिदिन 30000 करोड रुपए का घाटा होगा। जिसके कारण उनके विकास कार्यों में बाधा आएगी। इसीलिए सरकार तेल के दाम कम नहीं कर पा रही है। भारत में पेट्रोल का नियंत्रण सरकार के हाथ में नहीं है लेकिन डीजल, केरोसीन और रसोई गैस पर सरकार सब्सिडी देती है जिसके कारण इसकी कीमत नियंत्रित रहती है।

इसके बाद भी अगर आप सोचते होंगे कि हमें 30 से ₹35 लीटर तेल मिल जाएगा तो आप गलत सोचते हैं, क्योंकि सरकार को सबसे ज्यादा रेवेन्यू पेट्रोल और डीजल से ही मिलती है। जिसको वह बड़े-बड़े प्रोजेक्ट, रोड बिजली पानी शिक्षा इत्यादि में खर्च करते हैं। खैर मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि मैं कल भी 100 रुपए का ही डलवाता था और आज भी 100 का ही डलवाता हूं।

उम्मीद करता हूं Petrol Diesel price से संबंधित जानकारी आपको मिल गई होगी।

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Author: Vicky
Vicky, इस ब्लॉग वेबसाइट का फाउंडर है। बचपन से ही इनकी रूचि लेखन क्षेत्र में रही है। इनका लक्ष्य हिंदी भाषी क्षेत्र के लोगों के लिए हिंदी में जानकारी उपलब्ध करवाना है, जिन्हें अंग्रेजी में समस्या होती है।

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