दुर्गा पूजा कब है 2022 | Durga Puja का इतिहास, महत्व, तथा निबंध

दुर्गा पूजा कब है 2022? | Durga Puja का इतिहास, महत्व, तथा निबंध

दुर्गा पूजा हिंदू धर्म का एक बड़ा, प्रसिद्ध और महत्वपूर्ण त्यौहार है। इस त्यौहार में मां शक्ति के नौ रूपों की आराधना की जाती है। निरंतर 10 दिनों तक चलने वाली यह उत्सव मां शक्ति की जल समाधि के साथ संपन्न हो जाती है।

दुर्गा पूजा को दुर्गोत्सव या शरदोत्सव के नाम से भी जाना जाता है। दुर्गा पूजा देश के कई भागों में धूमधाम से मनाया जाता है। हालांकि पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा की भव्यता अलग ही होती है। यहां इसे बांग्ला भाषा में “Dugga Puja” के नाम से जाना जाता है।

10 दिनों तक चलने वाली इस त्यौहार को मनाने के लिए वे महीनों पहले इसकी तैयारी शुरू कर देते हैं। यह दक्षिण एशिया में मनाया जाने वाला सबसे बड़ा वार्षिक हिंदू पर्व में से एक है।

कई लोगों का सवाल है कि आखिर 2022 का दुर्गा पूजा कब है? (Durga Puja 2022 date). आइए इस आर्टिकल में हम जानते हैं कि आखिर इस वर्ष दुर्गा पूजा किस तिथि को पड़ता है।

दुर्गा पूजा कब है? (Durga Puja 2022 date)

हिंदू पंचांग के अनुसार दुर्गा पूजा प्रत्येक वर्ष अश्विन महीने की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को शुरू होती है। दशमी पूजन के साथ यह पर्व संपन्न हो जाती है। ईसाई अथवा ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार दुर्गा पूजा सितंबर या अक्टूबर महीने में शुरू होती है।

इस वर्ष Durga Puja 2022 की शुरुआत 26 सितंबर को कलश स्थापना के साथ होगी। हालांकि षष्ठी तिथि से शुरू होने वाली महापूजा 1 अक्टूबर 2022 से शुरू होकर 5 अक्टूबर 2022 मूर्ति विसर्जन के साथ समाप्त होगी। कलश स्थापना से लेकर विसर्जन तक चलने वाली पूजा के क्रम तथा तिथि इस प्रकार हैं-

दुर्गा पूजा 2022 तिथिमां शक्ति की उपासना
26-09-2022 (सोमवार)शैलपुत्री
27-09-2022 (मंगलवार)ब्रह्मचारिणी
28-09-2022 (बुधवार)चंद्रघंटा
29-09-2022 (गुरुवार)कूष्मांडा
30-09-2022 (शुक्रवार)मां स्कंदमाता
01-10-2022 (शनिवार)कात्यायनी
02-10-2022 (रविवार)कालरात्रि
03-10-2022 (सोमवार)महागौरी
04-10-2022 (मंगलवार)सिद्धिदात्री
05-10-022 (बुधवार)विजयादशमी
Durga puja 2022 date

दुर्गा पूजा का इतिहास, निबंध

इस त्यौहार को बुराई पर अच्छाई की जीत के उत्सव के रूप में मनाया जाता है। विजयदशमी के दिन भगवान श्री राम ने रावण के ऊपर विजय पाया था। जिसके कारण इसे विजय उत्सव अथवा विजयादशमी के रूप में मनाते हैं।

सदियों से लोग इस त्यौहार को बड़े हर्ष और उल्लास के साथ मनाते आए हैं। देश के कई भागों में इस दिन रामलीला का मंचन किया जाता है। बंगाल, असम और त्रिपुरा जैसे राज्यों में इस त्यौहार की भव्यता अलग ही होती है।

एक अन्य मान्यता के अनुसार विजयादशमी के दिन मां शक्ति ने दुष्ट राक्षस महिषासुर का वध किया था। महिषासुर काफी बलशाली राक्षस था। उन्होंने ब्रह्मा जी को प्रसन्न कर अमर होने का वरदान मांगा था। ब्रह्मा जी ने उन्हें वैसा ही वरदान दिया।

लेकिन उन्होंने कहा कि आपको कोई पुरुष नहीं मार सकता, परंतु आपकी मृत्यु स्त्री के हाथ से हो सकती है। बलशाली महिषासुर शक्ति की घमंड में चूर हो गया। उन्होंने देवताओं पर आक्रमण करना शुरू कर दिया। स्वर्ग लोक में हाहाकार मच जाता है।

चिंतित सभी देवता ब्रह्मा, विष्णु और महेश के शरण में चले जाते हैं। महिषासुर के आतंक को देखकर हर देवता दंग रह गया। तब तीनों देवताओं की आंतरिक शक्ति से एक स्त्री उत्पन्न होती है। इसे मां शक्ति अथवा दुर्गा के रूप में जाना जाता है।

मां दुर्गा और महिषासुर के बीच भयंकर युद्ध के बाद विजयादशमी के दिन मां दुर्गा ने महिषासुर का संहार किया। तब से इस दिन को विजयादशमी के रूप में मनाया जाने लगा।

कहा जाता है कि विजयादशमी के दिन प्रभु राम ने मां दुर्गा की आराधना की थी। जिसके बाद प्रभु श्री राम ने रावण का वध कर विजय प्राप्त किया था।

दुर्गा पूजा का महत्व

मां दुर्गा शक्ति का अवतार है। इस त्यौहार को पूरे 9 दिनों तक मनाया जाता है। जहां प्रत्येक दिन मां शक्ति के अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। कई लोग मां दुर्गा के लिए 9 दिनों तक उपवास रखते हैं।

वे मां दुर्गा की प्रतिमा को सजाकर धूपबत्ती, प्रसाद, नारियल, जल, कुमकुम, सिंदूर इत्यादि अपनी क्षमता के अनुसार अर्पित करते हैं। दुर्गा पूजा के नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। इसके बाद 9 छोटी-छोटी कन्याओं को भोजन करवाया जाता है।

चारों और खुशी का माहौल होता है। मां दुर्गा की पूजा लोगों के लिए शांति और समृद्धि लेकर आती है। उस दिन ऐसा लगता है मानो मां दुर्गा स्वयं हमारे घरों में पधारे हैं। मान्यता यह है कि मां दुर्गा की आराधना से जीवन आनंद हो जाता है।

घर में सुख शांति और समृद्धि आती है। अंधकार का नाश होने के साथ-साथ बुरी शक्तियों का खात्मा होता है। दुर्गा पूजा कलश स्थापना के साथ शुरुआत हो जाती है। लेकिन मुख्य पूजा छठवें दिन यानी कि षष्ठी के साथ शुरू होती है तथा विजयादशमी तक चलती है।

इस वर्ष 2022 में दुर्गा पूजा कब है?

इस वर्ष 2022 में दुर्गा पूजा 26 सितंबर कलश स्थापना से शुरू होकर 5 अक्टूबर विजयादशमी को समाप्त होंगी। दुर्गा पूजा में महिलाएं गरबा नृत्य करती है। गुजरात का डांडिया और गरबा नृत्य पूरे भारत में मशहूर है। अब डांडिया नृत्य में कुछ कुछ फूहड़ता आने लगी है। पारंपरिक नृत्य छोड़कर लोग अब डीजे के धुन में नाचने लगे हैं।

ऐसा बिल्कुल नहीं करना चाहिए। यह हमारे संस्कृति के विपरीत है। पूरे भारत में मां दुर्गा की पूजा उत्साह के साथ मनाया जाता है। आप भी अपने घरों में अथवा पूजा पंडालों में जाकर मां दुर्गा की पूजा धूमधाम से मनाएं।

यह त्यौहार सभी गिले-शिकवे को मिटा देते हैं तथा भाईचारा लेकर आते हैं। हमारी संस्कृति पर हमें गर्व होना चाहिए।

इस आर्टिकल को पूरा पढ़ने के बाद आप जान गए होंगे कि आखिर 2022 में दुर्गा पूजा कब है? इसके तारीख के बारे में आपको जानकारी मिल गई होगी। आशा करता हूं यह आर्टिकल आपको अच्छा लगा होगा। धन्यवाद!

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Author: Vicky
Vicky, इस ब्लॉग वेबसाइट का फाउंडर है। बचपन से ही इनकी रूचि लेखन क्षेत्र में रही है। इनका लक्ष्य हिंदी भाषी क्षेत्र के लोगों के लिए हिंदी में जानकारी उपलब्ध करवाना है, जिन्हें अंग्रेजी में समस्या होती है।

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